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My Poets

रात साया कहाँ से गुजरा है

रात साया कहाँ से गुजरा है
तुम्हे देखने को चाँद उतरा है

बारिश, हवा, महक सब क्या है
तेरी जुल्फ का एक कतरा है

व्यस्तताओं में सुकून देने अचानक कौन आ जाता है

व्यस्तताओं में सुकून देने अचानक कौन आ जाता है

तुम्हे याद करते है और तुम्हारा फ़ोन आ जाता है

शिकायत है किताबो से, कैसा ये काम रखा है

शिकायत है किताबो से, कैसा ये काम रखा है

खाली पन्नो पे तुमने लिखना मेरा नाम सीखा है

ये कैसे दिल है पाले हमने, अपने अपने अंदर

जिस पर मैंने राधा और तुमने घनश्याम लिखा है

तुमने अपने चेहरे से जब उठाया घूंघट

तुमने अपने चेहरे से जब उठाया घूंघट

फूलों के दामन में तितलियाँ बिखर गई

तुमने प्यार से कहा जब मुझे अपना सजन

सूनी सूनी ज़िंदगी मेरी भी संवर गई

कल रात फूलों की सबसे हसीं शाखों से गुजरा

कल रात फूलों की सबसे हसीं शाखों से गुजरा

मैं सुबह का ख्वाब बनकर तुम्हारी आँखों से गुजरा